PM Fasal Bima Yojana 2026: खेती में मौसम का भरोसा हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कभी भारी बारिश, बाढ़ और जलभराव से फसल खराब हो जाती है तो कभी सूखा, ओलावृष्टि, चक्रवात, कीट या बीमारी किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए केंद्र सरकार की PM Fasal Bima Yojana यानी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। योजना की ताजा स्थिति देखें तो केंद्रीय बजट 2026-27 में फसल बीमा के लिए ₹12,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2016 में योजना शुरू होने से लेकर रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों का बीमा किया जा चुका है और 26.33 करोड़ से ज्यादा किसान आवेदनों के लिए ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक के दावों का भुगतान हुआ है।
PM Fasal Bima Yojana 2026 Overview
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना |
| अंग्रेजी नाम | Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana |
| शॉर्ट नाम | PMFBY |
| शुरुआत | 18 फरवरी 2016 |
| योजना का संचालन | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| 2026-27 बजट प्रावधान | ₹12,200 करोड़ |
| योजना में कवरेज | बुवाई से पहले से कटाई के बाद तक निर्धारित जोखिम |
| खरीफ किसान प्रीमियम | अधिकतम 2% |
| रबी किसान प्रीमियम | अधिकतम 1.5% |
| वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसल | अधिकतम 5% |
| ताजा आंकड़े | रबी 2025-26 तक |
| बीमित किसान आवेदन | 92.46 करोड़ से अधिक |
| भुगतान किए गए दावे | 26.33 करोड़ से अधिक |
| भुगतान किए गए दावे की राशि | ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक |
| आधिकारिक पोर्टल | PMFBY |
इस में क्या नया है
PMFBY को लेकर इस समय सबसे महत्वपूर्ण जानकारी केंद्रीय बजट 2026-27 से जुड़ी है। सरकार ने फसल बीमा योजनाओं के लिए ₹12,200 करोड़ का प्रावधान रखा है। 29 अगस्त 2026 को जारी सरकारी जानकारी में भी इस राशि की पुष्टि की गई है। इससे साफ है कि फसल बीमा व्यवस्था को 2026-27 में भी जारी रखते हुए किसानों को प्राकृतिक और मौसम संबंधी जोखिमों से सुरक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले दस वर्षों में योजना का दायरा काफी बढ़ा है। खरीफ 2016 से रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों का बीमा किया गया और 26.33 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों पर ₹2.06 लाख करोड़ से ज्यादा के दावों का भुगतान किया गया। ये आंकड़े योजना की शुरुआत से लेकर रबी 2025-26 तक के हैं।
PM Fasal Bima Yojana की शुरुआत कब हुई थी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत 18 फरवरी 2016 को की गई थी। योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और ऐसे जोखिमों से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ किफायती बीमा सुरक्षा देना है जिन्हें किसान सामान्य परिस्थितियों में रोक नहीं सकता। योजना में बुवाई से पहले की स्थिति से लेकर फसल कटाई के बाद तक निर्धारित जोखिमों को शामिल किया जा सकता है।
समय के साथ योजना में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया गया है। फसल नुकसान और उपज के आकलन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल आधारित डेटा, ड्रोन और मौसम संबंधी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। YES-TECH और WINDS जैसी पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
किसानों को कितना प्रीमियम देना पड़ता है
PMFBY में किसान का प्रीमियम सामान्य तौर पर फसल के प्रकार के आधार पर सीमित रखा गया है। खरीफ की खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए किसान के हिस्से का अधिकतम प्रीमियम बीमित राशि का 2 प्रतिशत है। रबी खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए यह अधिकतम 1.5 प्रतिशत और वार्षिक वाणिज्यिक या बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत है। शेष पात्र प्रीमियम का बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन किया जाता है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी खरीफ फसल के लिए किसान की बीमित राशि ₹50,000 है तो सामान्य अधिकतम किसान प्रीमियम 2 प्रतिशत के हिसाब से ₹1,000 होगा। वास्तविक राशि संबंधित राज्य की अधिसूचना, फसल, क्षेत्र और बीमा विवरण के अनुसार निर्धारित होती है।
किन फसलों और किसानों को मिल सकता है लाभ
PMFBY में अधिसूचित खाद्यान्न, तिलहन और निर्धारित वार्षिक वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों को शामिल किया जा सकता है। योजना में पात्र किसानों के रूप में भूमि पर खेती करने वाले किसान, कुछ परिस्थितियों में बटाईदार और किरायेदार किसान भी शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे संबंधित राज्य की अधिसूचना और योजना के नियमों के अनुसार पात्र हों।
किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल योजना का नाम जानना पर्याप्त नहीं है। उसके क्षेत्र में कौन सी फसल अधिसूचित है, कितना बीमित क्षेत्र स्वीकार किया जाएगा और किस तारीख तक नामांकन होगा, यह राज्य और जिला स्तर की अधिसूचना से तय होता है।
किन कारणों से फसल का नुकसान होने पर बीमा मिल सकता है
योजना के तहत गैर-रोकथाम योग्य प्राकृतिक जोखिमों से होने वाले निर्धारित नुकसान को कवर किया जाता है। इनमें सूखा, बाढ़, जलभराव, चक्रवात, ओलावृष्टि, भूस्खलन, प्राकृतिक आग और बिजली जैसी आपदाओं के साथ कीट और रोगों से होने वाला निर्धारित नुकसान शामिल हो सकता है।
इसके अलावा योजना में कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए prevented sowing, मध्य-मौसम प्रतिकूलता, स्थानीय आपदा और फसल कटाई के बाद होने वाले निर्धारित नुकसान की भी व्यवस्था है। हालांकि हर जोखिम हर क्षेत्र और हर फसल पर अपने आप लागू नहीं होता। राज्य द्वारा जारी अधिसूचना में संबंधित कवरेज और शर्तों को देखना जरूरी होता है।
बुवाई न हो पाने पर भी मिल सकता है लाभ
कई बार किसान खेत तैयार कर लेता है लेकिन अत्यधिक बारिश, सूखा या किसी अन्य अधिसूचित प्रतिकूल मौसम की वजह से फसल की बुवाई ही नहीं कर पाता। PMFBY में ऐसी स्थिति को prevented sowing या failed sowing के रूप में निर्धारित शर्तों के तहत कवर किया जा सकता है। सरकारी जानकारी के अनुसार इस स्थिति में अधिकतम 25 प्रतिशत तक बीमित राशि के स्तर पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान हो सकता है।
इसके लिए संबंधित राज्य सरकार द्वारा क्षेत्र और फसल के लिए प्रावधान को लागू करना जरूरी होता है। किसान को स्वयं यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि बुवाई न होने पर हर स्थिति में स्वतः भुगतान मिल जाएगा।
फसल कटने के बाद नुकसान होने पर क्या होगा
फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई कुछ अधिसूचित फसलों को भी निर्धारित परिस्थितियों में बीमा सुरक्षा मिल सकती है। सरकारी जानकारी के अनुसार कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक कुछ निर्दिष्ट जोखिमों से होने वाले नुकसान को कवर किया जा सकता है। इसमें विशेष रूप से चक्रवात और बेमौसम बारिश जैसे निर्धारित जोखिम शामिल हो सकते हैं।
इसका लाभ तभी मिलेगा जब संबंधित फसल और क्षेत्र योजना के तहत अधिसूचित हों और नुकसान योजना में निर्धारित शर्तों के अनुरूप हो।
PM Fasal Bima Yojana में आवेदन की अंतिम तारीख कब होती है
फसल बीमा की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी में से एक इसकी कट-ऑफ डेट है। यह तारीख पूरे देश में एक समान नहीं होती। संबंधित राज्य सरकार द्वारा फसल और क्षेत्र के अनुसार अंतिम तारीख तय की जाती है। आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों में सामान्य संकेतक के रूप में खरीफ के लिए 15 जुलाई और रबी के लिए 15 दिसंबर तक की समयसीमा दी गई है, लेकिन वास्तविक कट-ऑफ राज्य की अधिसूचना और स्थानीय फसल कैलेंडर के आधार पर तय होती है।
इसलिए 2026 के लिए किसी किसान को केवल इंटरनेट पर दिखाई देने वाली एक सामान्य तारीख देखकर आवेदन नहीं करना चाहिए। अपने राज्य, जिले और फसल की अधिसूचना में दी गई अंतिम तारीख ही अंतिम मानी जानी चाहिए।
किसान PMFBY में आवेदन कैसे कर सकते हैं
पात्र किसान योजना के तहत बैंक शाखा, PACS, CSC, अधिकृत चैनल पार्टनर या उपलब्ध ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। गैर-ऋणी किसान के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन और प्रीमियम जमा करना होता है। PMFBY के आधिकारिक पोर्टल पर किसान लॉगिन और पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध है।
आवेदन करते समय किसान को अपनी जमीन, फसल, बैंक खाता और पहचान संबंधी जानकारी सही देनी चाहिए। गलत फसल, गलत क्षेत्र या अधूरे दस्तावेज बाद में बीमा कवरेज और क्लेम प्रक्रिया में परेशानी पैदा कर सकते हैं।
नुकसान होने के बाद किसान को क्या करना चाहिए
यदि अधिसूचित फसल को स्थानीय आपदा या अन्य व्यक्तिगत स्तर पर कवर किए गए नुकसान से नुकसान हुआ है तो किसान को निर्धारित समय में इसकी सूचना संबंधित चैनल के माध्यम से देनी चाहिए। योजना में स्थानीय आपदा और कटाई के बाद नुकसान के लिए अलग प्रक्रिया और समयसीमा होती है।
किसान को नुकसान की स्थिति में अपने बैंक, संबंधित बीमा कंपनी, कृषि विभाग या अधिकृत चैनल से तुरंत संपर्क करना चाहिए। देरी करने से नुकसान की जांच और दावा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
फसल बीमा का पैसा कैसे मिलता है
PMFBY में दावों की गणना और भुगतान के लिए National Crop Insurance Portal का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने DigiClaim मॉड्यूल भी लागू किया है, जो पोर्टल को Public Financial Management System और बीमा कंपनियों की प्रणालियों से जोड़ता है। सरकारी जानकारी के अनुसार खरीफ 2024 से देरी होने पर 12 प्रतिशत की पेनल्टी का प्रावधान भी लागू किया गया है।
दावा स्वीकृत होने के बाद पात्र राशि किसान के बैंक खाते में DBT के माध्यम से पहुंचाई जाती है। इसलिए बैंक खाते की जानकारी सही और सक्रिय रखना भी बहुत जरूरी है।
PMFBY में तकनीक का इस्तेमाल कैसे हो रहा है
फसल नुकसान के आकलन को अधिक सटीक बनाने के लिए योजना में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ाया जा रहा है। YES-TECH यानी Yield Estimation System Based on Technology के जरिए रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों की मदद से फसल उपज का आकलन करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार इसे धान और गेहूं के लिए खरीफ 2023 से लागू किया गया और खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया।
इसके साथ WINDS यानी Weather Information Network and Data System के जरिए Automatic Weather Stations और Automatic Rain Gauges का नेटवर्क बढ़ाने की योजना है। इससे ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर तक अधिक स्थानीय मौसम डेटा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
2026-27 में PMFBY के लिए कितना पैसा रखा गया है
केंद्रीय बजट 2026-27 में फसल बीमा योजनाओं के लिए ₹12,200 करोड़ का बजट प्रावधान है। PRS के बजट विश्लेषण के अनुसार 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि ₹12,267 करोड़ थी, जबकि 2026-27 के बजट अनुमान में ₹12,200 करोड़ रखा गया है।
सरकार की 29 अगस्त 2026 की जानकारी भी ₹12,200 करोड़ के आवंटन की पुष्टि करती है और इसे किसानों को फसल जोखिम से सुरक्षा देने की निरंतर व्यवस्था से जोड़ती है।
PM Fasal Bima Yojana के आंकड़े क्या बताते हैं
योजना की शुरुआत से लेकर रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से ज्यादा किसान आवेदन बीमित किए गए हैं। इसी अवधि में 26.33 करोड़ से ज्यादा किसान आवेदनों पर कुल ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक के दावों का भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा किसान व्यक्तियों की संख्या नहीं बल्कि बीमित किसान आवेदनों का है, इसलिए इसे सीधे किसानों की कुल संख्या नहीं समझना चाहिए।
सरकार के अगस्त 2025 के आंकड़ों में भी योजना के विस्तार की जानकारी दी गई थी। 2024-25 में 4.19 करोड़ किसान आवेदन योजना में शामिल हुए थे, जो योजना शुरू होने के बाद सबसे अधिक नामांकन बताया गया था।
शिकायत या क्लेम में परेशानी हो तो कहां संपर्क करें
PMFBY से संबंधित शिकायतों और जानकारी के लिए KRPH यानी Krishi Rakshak Portal and Helpline की व्यवस्था की गई है। सरकारी जानकारी के अनुसार इसका टोल-फ्री नंबर 14447 है। किसान शिकायत दर्ज करने के बाद मिलने वाले टिकट नंबर से अपनी शिकायत की स्थिति भी ट्रैक कर सकते हैं।
इसके अलावा किसान अपने बैंक, CSC, संबंधित बीमा कंपनी या जिला कृषि विभाग से भी संपर्क कर सकता है। किसी भी नुकसान की स्थिति में शिकायत या नुकसान की सूचना देने से पहले अपनी फसल, खेत और नुकसान से जुड़े जरूरी प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी रहता है।
किसानों के लिए सबसे जरूरी बात
PMFBY में आवेदन करने से पहले किसान को केवल प्रीमियम की राशि नहीं देखनी चाहिए। अपने जिले में कौन सी फसल अधिसूचित है, कितनी बीमित राशि तय हुई है, कौन से जोखिम कवर हैं और आवेदन की अंतिम तारीख क्या है, इन सभी बातों को देखना जरूरी है।
खास तौर पर 2026 के खरीफ और आने वाले रबी सीजन में अंतिम तारीख को लेकर भ्रम से बचना जरूरी है क्योंकि राज्य और फसल के अनुसार समयसीमा अलग हो सकती है। आधिकारिक PMFBY पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी और राज्य सरकार की अधिसूचना को प्राथमिकता देना सबसे सुरक्षित तरीका है।
डिस्क्लेमर: PM Fasal Bima Yojana से जुड़ी यह जानकारी 6 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक और ताजा सरकारी स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। प्रीमियम, अधिसूचित फसल, बीमित राशि, जोखिम, आवेदन की अंतिम तारीख और क्लेम की प्रक्रिया राज्य, जिला और फसल के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन या क्लेम करने से पहले अपने राज्य की संबंधित अधिसूचना और आधिकारिक PMFBY पोर्टल पर दी गई जानकारी जरूर जांचें।